Pages

Tuesday, March 9, 2010

नवरात्र से नवजीवन

नवरात्र से नवजीवन


अशोक प्रियदर्शी

यह महज एक संयोग नहीं है कि नवरात्र का उपवास ठीक उसी समय आता है, शारीरिक शुद्धि के लिए जिस समय की अनुशंसा आयुर्वेद भी करता है। आधुनिक विज्ञान व चिकित्सा शास्त्र भी यह मानता है कि धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं, विशेष आयोजन, व्रत, उपवास आदि हमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं और हमें जीवन ऊर्जा से भर देते हैं।

शारीरिक शुद्धि के लिए आयुर्वेद में प्रत्येक छह माह या दो प्रमुख मौसमों- गर्मी व सर्दी के बाद पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके लिए मार्च-अप्रैल व सितंबर-अक्टूबर के महीने बेहतर माने जाते हैं। शारीरिक शुद्धि का एक आसान स्वरूप हमें नवरात्र में देखने को मिलता है, जब लोग उपवास रखते हैं। यह महज एक संयोग नहीं है कि नवरात्र का उपवास ठीक उसी समय आता है, शारीरिक शुद्धि के लिए जिस समय की अनुशंसा आयुर्वेद भी करता है। नवरात्र का अर्थ है- नौ पवित्र रातें। चंद्र पंचांग के अनुसार ये नौ रातें चैत्र (मार्च-अप्रैल के मध्य) तथा आश्विन (सितंबर-अक्टूबर के मध्य) शुक्ल पक्ष की आरंभिक नौ रातें होती हैं। नवरात्र में शक्ति की देवी (मां दुर्गा) के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है।
आधुनिक विज्ञान व चिकित्सा शास्त्र भी यह मानता है कि धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं, विशेष आयोजन, व्रत, उपवास आदि हमें शारीरिक व मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं और हमें जीवन ऊर्जा से भर देते हैं। इस दौरान पथ्यापथ्य के नियमों के पालन से शरीर शुद्ध होता है और सात्विक विचारों, जप आदि से दिमाग को मजबूती मिलती है। आयुर्वेद में निराहार (पूर्ण उपवास) वर्जित माना गया है, क्योंकि यह वात विकृति उत्पन्न करता है। अत: नवरात्र में आंशिक उपवास की सलाह दी जाती है, जिसे पथ्यापथ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यदि इसका ध्यान नहीं रखा गया या तली, भुनी चीजों का अधिक सेवन किया गया, तो आप इसके लाभ से वंचित रह सकते हैं। उपवास के दौरान अनाजों, जैसे- गेहूं, चावल, जौ, मक्का आदि की बजाय फल व दूध से बने पदार्थों का सेवन दिन में दो बार करें। सुबह में हल्का आहार लें, जिसमें फल व दूध शामिल हो। इसके अलावा सूखे मेवे व फल, जैसे- बादाम, किशमिश, नारियल आदि भी ले सकते हैं। शारीरिक श्रम करने वाले दोपहर में भी फल आदि ले सकते हैं। शाम को टमाटर, सब्जियां, पनीर आदि का सेवन करें। नवरात्र के दौरान बाजार में विभिन्न प्रकार का फलाहारी आटा, जैसे- सिंघाड़े का आटा, कुट्टुक का आटा आदि मिलता है, इनसे निर्मित आहार में टमाटर का प्रयोग न करें। शाम को एक प्लेट मिश्रित सब्जी का सेवन जरूर करें, लेकिन तले, भुने व अधिक वसायुक्त भोजन, प्याज, लहसुन, मसाले आदि के सेवन से बचें। आहार में सेंधा नमक के अलावा जीरा, सौंफ, लौंग, इलायची, ताजा अदरक आदि का प्रयोग किया जा सकता है, मगर खट्टे फल के सेवन से बचें। केले व पपीते का सेवन जरूर करें।
नवरात्र के दौरान मन में सात्विक भाव, जैसे- प्रेम, अनुराग, करुणा, दया आदि जगाने का प्रयास करें तथा तामसिक भाव, जैसे- दूसरों की बुराई, क्रोध, ईष्र्या आदि से बचें।
सुबह-शाम मां दुर्गा के मंत्र का जप करें। एकाग्रता व चिंतन-मनन के लिए किसी और विधा का चुनाव किया जा सकता है। इस प्रकार नौ दिन का यह व्रत आपको स्वस्थ व सक्रिय रखता है। आमतौर पर जो लोग ज्यादा सोते हों, थका-बुझा महसूस करते हों व उन्हें अपना वजन बढ़ा हुआ (कफ विकार) महसूस होता हो, इस दौरान उन्हें अच्छा लगता है। जिनके शरीर में अत्यधिक गर्मी (पित्त विकार) हो, उन्हें इस दौरान हल्का दस्त लग सकता है। लेकिन इससे वे चिंतित न हों, क्योंकि इसके माध्यम से उनके शरीर की गर्मी बाहर निकल जाएगी व पित्त भी संतुलित हो जाएगा। सात्विक आहार-विहार के कारण वात विकार से प्रभावित लोग भी इस दौरान अच्छा महसूस करते हैं। इस बहाने बहुत से लोगों द्वारा किया जाने वाला तंबाकू, शराब, नशीली दवाइयों आदि का सेवन भी बंद हो जाता है।
इंडिया न्यूज़ साप्ताहिक में प्रकाशित लेख

1 comment: